चित्तौड़गढ़। बिरला कॉर्पोरेशन लिमिटेड ने दिसंबर तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन दर्ज करते हुए 53 करोड़ रुपये का समेकित शुद्ध लाभ अर्जित किया, जो पिछले वर्ष की समान तिमाही की तुलना में 71 प्रतिशत अधिक है। इस अवधि में कंपनी का समेकित ईबीआईटीडीए 18 प्रतिशत बढ़कर 312 करोड़ रुपये रहा।
कंपनी द्वारा परिचालन लागत को तर्कसंगत बनाने, उत्पाद एवं भौगोलिक मिश्रण को अनुकूलित करने तथा संयंत्रों में क्षमता उपयोग बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों का सकारात्मक असर देखने को मिला। सीमेंट डिवीजन का ईबीआईटीडीए मार्जिन बढ़कर 14.8 प्रतिशत हो गया, जो गत वर्ष इसी अवधि में 11.9 प्रतिशत था। वहीं, समग्र सीमेंट उत्पादन लागत वर्ष-दर-वर्ष 4 प्रतिशत कम हुई।
हालांकि, समेकित राजस्व 4 प्रतिशत घटकर 2,178 करोड़ रुपये रहा। इसका कारण सीमेंट बिक्री मात्रा में 6 प्रतिशत की गिरावट रही, जो 4.23 मिलियन टन पर आ गई। बाजारों में 4 से 6 प्रतिशत मूल्य गिरावट का भी असर पड़ा। कंपनी ने नवंबर 2025 से लागू होने वाली श्रम संहिताओं के संभावित प्रभाव के मद्देनज़र 34 करोड़ रुपये का प्रावधान किया, जिसे असाधारण मद के रूप में दर्शाया गया है।
अक्टूबर-नवंबर में मांग सुस्त रही, लेकिन दिसंबर में बी2बी खंड के नेतृत्व में इसमें तेज सुधार हुआ। बी2सी बाजार में कंपनी ने मिश्रित एवं प्रीमियम सीमेंट की बिक्री पर विशेष ध्यान केंद्रित किया। तिमाही में मिश्रित सीमेंट की बिक्री कुल बिक्री का 87 प्रतिशत रही, जो पिछले वर्ष 79 प्रतिशत थी। वहीं, प्रीमियम सीमेंट की बिक्री बी2सी खंड में 63 प्रतिशत तक पहुंच गई।
प्रीमियम ब्रांड परफेक्ट प्लस की बिक्री मात्रा में 19 प्रतिशत तथा यूनिक प्लस में 29 प्रतिशत की वर्ष-दर-वर्ष वृद्धि दर्ज की गई। पश्चिम बंगाल एवं महाराष्ट्र में कंपनी को सीमेंट बिक्री में विशेष बढ़त मिली।
परिचालन दक्षता में सुधार से प्रति टन ईबीआईटीडीए 23 प्रतिशत बढ़कर 702 रुपये हो गया। ईंधन मिश्रण के अनुकूलन एवं नवीकरणीय ऊर्जा उपयोग बढ़ाने से प्रति टन बिजली-ईंधन लागत 6 प्रतिशत घटी। नवीकरणीय बिजली की खपत 26 प्रतिशत से बढ़कर 31 प्रतिशत हो गई।
कंपनी ने दुर्गापुर सीमेंट संयंत्र में बैगास पावर सोर्सिंग समझौता किया है, जबकि बिरला जूट मिल्स में रूफटॉप सोलर प्लांट से उत्पादन शुरू हो चुका है। इसके अलावा, मैहर संयंत्र में 17 मेगावाट विंड-सोलर हाइब्रिड परियोजना तथा मुकुटबान संयंत्र में ग्राउंड-माउंटेड सोलर प्लांट पर कार्य प्रगति पर है।
चौथी तिमाही में सीमेंट मांग में सुधार के संकेत मिल रहे हैं, हालांकि बाजार में तीव्र प्रतिस्पर्धा के कारण मूल्य वृद्धि सीमित रहने की संभावना है।
जूट डिवीजन में कच्चे जूट की कमी एवं कीमतों में तेज उछाल के कारण दिसंबर तिमाही में 2.14 करोड़ रुपये की नकदी हानि हुई। बावजूद इसके, जूट एवं शॉपिंग बैग से तिमाही राजस्व 132 करोड़ रुपये रहा, जो घरेलू एवं निर्यात बिक्री में उल्लेखनीय वृद्धि के चलते संभव हुआ।
कंपनी मूल्यवर्धित उत्पादों एवं मशीनरी उन्नयन के माध्यम से दीर्घकालिक अवसरों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। हालांकि, निकट भविष्य में कच्चे जूट की उपलब्धता एवं कीमतें प्रमुख चुनौती बनी रह सकती हैं।