उज्जैन। लोकदेवता तेजाजी महाराज के प्रति आस्था और श्रद्धा प्रकट करने के लिए कायथा नगर में जन्मोत्सव के अवसर पर अनेक धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। कार्यक्रमों में भजन, कीर्तन, धार्मिक कथा, पूजा-अर्चना सहित विविध आयोजन हुए, जिनमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया।
मान्यताओं के अनुसार तेजाजी महाराज का जन्म माघ शुक्ल पक्ष चतुर्दशी, विक्रम संवत 1130 (29 जनवरी 1074) को राजस्थान के खरनाल गांव में धोलीया गोत्र के जाट परिवार में हुआ था। तेजाजी महाराज को गोरक्षक, सत्यवादी, लोकदेवता और सत्य रक्षक के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि गौ-रक्षा के लिए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया, जिसके चलते वे लोकदेवता के रूप में पूजे जाने लगे।
किंवदंती के अनुसार, वचन निभाते हुए तेजाजी महाराज की जिह्वा पर नाग के काटने से मृत्यु हुई थी। इस मार्मिक बलिदान के बाद से ही वे लोकदेवता के रूप में जन-जन की आस्था का केंद्र बन गए।
जन्मोत्सव के अवसर पर बस स्टैंड कायथा स्थित श्री तेजाजी महाराज मंदिर में विशेष आयोजन किए गए। मंदिर को आकर्षक फूलों और रंग-बिरंगी विद्युत लड़ियों से सजाया गया। सुबह तेजाजी महाराज का अभिषेक एवं पूजन किया गया, इसके बाद छप्पन भोग अर्पित कर महाआरती संपन्न हुई।
इस अवसर पर ढोल-ढमाके, डीजे, घोड़े और सुसज्जित बग्घी के साथ नगर में भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसने पूरे नगर को भक्तिमय वातावरण से सराबोर कर दिया। नगर सहित आसपास के क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने लोकदेवता तेजाजी महाराज के दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।