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February 3, 2026, 3:08 pm
KHABAR : नीमच में आज मनाई जाएगी शब-ए-बारात, मस्जिदों और दरगाहों में रोशनी से जगमगाएगा शहर, पवित्र रात में लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं, पढे़ खबर 

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नीमच। आज मुस्लिम समाजजनों द्वारा समूचे अंचल में शबे बरात मनाई जाएगी जिसको लेकर शहर सहित सभी जगाहों की मस्जिदों ओर दरगाहो में रोशनी कर साज सज्जा से सजाई गई है रात में सभी मस्जिदे दरगाहो में रोशनी जगमगायंगे। 

आपको बता दे कि आज की ये रात बड़ी मुकद्दस वाली रात मानी जाती हैं इस रात के बारे जानकारी देते हुवे जामा मस्जिद के शेर काजी सद्दाम हुसैन अत्तारी ने बताया कि शबे-बारात मुस्लिम समुदाय के लिए एक पवित्र रात मानी जाती है। यह इस्लामी कैलेंडर के शाबान महीने की 14वीं तारीख का दिन गुजारकर 15वीं रात में मनाई जाती है। इस रात को मुस्लिम पुरुष, महिलाएं और बच्चे सभी इबादत करते हैं। इस पवित्र रात में लोग अल्लाह से अपने गुनाहों की तौबा करते हैं और भविष्य में गलतियों से बचने का संकल्प लेते हैं। मुस्लिम समुदाय के लोग रात भर इबादत में लीन रहते हैं, कलाम पाक की तिलावत करते हैं और नफिल नमाज अदा करते हैं। सुबह में वे कब्रिस्तान जाकर अपने पूर्वजों के लिए दुआएं मांगते हैं। शबे-बारात का अर्थ श्बरी होने की रातश् या श्गुनाहों से मुक्ति की रातश् होता है। इसे लैलातुलकद्र या लैलततून निस्फशाबान भी कहा जाता है।


इस रात मुस्लिम समुदाय के लोग अपने घरों और मस्जिदों में नमाज अदा करते हैं, कलाम पाक की तिलावत करते हैं, जिक्र करते हैं और नफिल नमाज पढ़ते हैं। वे अपने गुनाहों से तौबा करते हैं और भविष्य में उन्हें न दोहराने का वादा करते हैं। शबे-बारात के अगले दिन मुस्लिम महिलाएं और पुरुष रोजा रखते हैं, जिसे बहुत पुण्यकारी माना जाता है।


आपको ये भी बतादे की शब-ए-बारात रात को मस्जिदों में इबादत की तैयारियों में गए है साथ ही कब्रिस्तानों में भी दोपहर से सफाई और फातिहा का सिलसिला जारी हो गया हैं क्योकि अगले माह मुकद्दस माहे रमज़ान से 15 दिन पहले आने वाला माह शाबान यानी शब-ए-बारात मुसलमानों के लिए बहुत अहम और बरकत वाली रात मानी जाती है। यह इस्लामी महीने शाबान की पंद्रहवीं रात होती है। माना जाता है कि इस रात अल्लाह अपने बंदों पर रहमत फरमाता है और सच्चे दिल से मांगी गई दुआ और तौबा कबूल होती है। इसलिए लोग इस रात को इबादत और मग़फ़िरत की रात कहते हैं।


इस रात क्या-क्या किया जाता है
कुरआन कि तिलावत मुस्लिम समुदाय के लोग इशा कि नमाज़ के बाद नफ्ल नमाज़ पढ़ते हैं, तस्बीह करते हैं और ज्यादा वक्त अल्लाह की इबादत में गुज़ारते हैं कुरआन की तिलावत घरों और मस्जिदों में कुरआन शरीफ पढ़ा जाता है ताकि सवाब हासिल हो और दिल को सुकून मिले साथ ही दुआ और अस्तग़फार अपने गुनाहों की माफी, घर-परिवार की सलामती और मुल्क में अमन के लिए खास दुआएं मांगी जाएगी


मस्जिदों का माहौल मस्जिदों में खास रौनक और नूरानियत रहती है। नमाज़, तिलावत और दुआ का सिलसिला देर रात तक जारी रहेगा। लोग सुकून और अदब के साथ इबादत में मशगूल रहेंगे


पूरी रात इबादत के बाद सुबह कब्रिस्तान की हाज़िरी लोग अपने अज़ीज़ो दुनिया से रुख़सत हुए मरहूम रिश्तेदारों की कब्र पर जाते हैं, फातिहा पढ़ते हैं, फूल चढ़ाते हैं और साफ-सफाई करते हैं। कई जगह कब्रों पर मिट्टी डालकर उन्हें दुरुस्त भी किया जाता है ताकि जगह साफ और सही रहे।


शब-ए-बारात का असल पैग़ाम माफी, मोहब्बत, भाईचारा और नेक रास्ते पर चलना है। यह रात इंसान को अपने गुनाहों पर सोचने, दूसरों को माफ करने और भलाई के काम करने की याद दिलाती है।

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