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February 5, 2026, 7:30 pm
KHABAR : जिन सहस्त्रनाम महाअर्चना विधान से विघ्न, रोग और भय का नाश होता है- आर्यिका विज्ञाश्री माताजी, पढे़ खबर 

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नीमच। जिन सहस्त्रनाम महाअर्चना मंडल विधान में सहभागी होने से व्यक्ति के जीवन में मनवांछित फल प्राप्ति के मार्ग में आने वाले सभी विघ्न दूर हो जाते हैं। इससे रोग, शोक और भय का निवारण होता है तथा परिवार में सुख, समृद्धि और शांति का वास होता है। ग्रह कलेश दूर होते हैं और मानसिक तनाव से मुक्ति मिलती है। यह उद्गार मालवा की लाल माटी पर ऐतिहासिक पंचकल्याणक करवाने वाले संत आचार्य 108 विराग सागर जी महाराज की सुशिष्या, परम पूज्य भारत गौरव आर्यिका रत्न 105 विज्ञाश्री माताजी ने व्यक्त किए।

वे दिगंबर जैन समाज नीमच द्वारा 40 विद्युत केंद्र के पीछे स्थित दिगंबर जैन मंदिर सभाकक्ष में आदिनाथ पद्म प्रभु के मोक्ष कल्याणक के पावन उपलक्ष्य में आयोजित जिन सहस्त्रनाम महाअर्चना विधान मंडल के दौरान विशाल धर्मसभा को संबोधित कर रही थीं। इस अवसर पर विश्व शांति एवं समाज में सुख-समृद्धि की कामना के साथ विधान संपन्न कराया गया।

आर्यिका माताजी ने कहा कि इस विधान का पुण्य फल 68 तीर्थों की यात्रा के समान होता है। गुरुमुख से निकले मंत्र शीघ्र फलदायी होते हैं। दृढ़ संकल्प, नियम और पूर्ण श्रद्धा के साथ इस विधान में भाग लेने से जीवन के सभी विघ्न स्वतः दूर हो जाते हैं। इस अवसर पर प्रभु के 1008 नामों का उच्चारण किया गया।

108 परिवारों ने दी 1008 आहुतियां
विधान के दौरान शांति धारा, जलाभिषेक, यज्ञ एवं दीप प्रज्वलन किया गया। 108 परिवारों द्वारा पंचमेवा, लौंग, बादाम, इलायची एवं अक्षत से 1008 मंत्रों के उच्चारण के साथ 1008 बार आहुतियां दी गईं। इस दौरान सभी पुरुष श्वेत वस्त्रों में एवं महिलाएं पीले परिधानों में सहभागी बनीं।

धर्मसभा में आर्यिका ज्ञेम्याश्री, ज्ञापकश्री, ज्ञेयश्री एवं क्षुल्लिका विज्ञप्ति श्री का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ।

प्रतिदिन हो रहे विविध धार्मिक आयोजन
समिति अध्यक्ष विजय विनायका (जैन ब्रोकर्स) एवं मीडिया प्रभारी अमन विनायका ने बताया कि प्रतिदिन धार्मिक आयोजनों की श्रृंखला के अंतर्गत प्रातः 5रू30 बजे जिन सहस्त्रनाम मंत्रावली, सुबह 7ः30 बजे शांति धारा, 9 बजे प्रवचन, दोपहर 3 बजे स्वाध्याय एवं आत्म अनुशासन, सायं 6ः30 बजे गुरु भक्ति एवं शंका समाधान तथा तत्पश्चात साधु-संतों की वैयावृत्ति सहित अन्य कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

उन्होंने बताया कि आर्यिका माताजी ससंघ बही पारसनाथ से जयपुर की ओर प्रस्थान करते हुए जयपुर में आयोजित धार्मिक अनुष्ठानों में मार्गदर्शन प्रदान करेंगी। इसी क्रम में निंबाहेड़ा (राजस्थान) जाते समय नीमच में प्रवास किया गया। गुरुवार को भी सुबह 9 बजे दिगंबर जैन मंदिर सभाकक्ष में प्रवचन, जिन सहस्त्रनाम विधान मंडल सहित विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान आयोजित किए गए।

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